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Patna. बिहार क्रिकेट में चयन को लेकर बच्चों की ज़िंदगी दाव पर लगी है जिसके चले एक माँ ने बीसीए अध्यक्ष से न्याय की गुहार लगाई है देखे।

मैं शीला कुमारी इस प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कुमार श्रेय उर्फ राजा बाबू कि माँ होने के नाते अपनी वास्तविक दर्द और पीड़ा से अवगत करा रही हूँ और उनसे बिहार के प्रतिभावान खिलाड़ियों के साथ हो रहे घोर अन्याय के खिलाफ न्याय की गुहार लगा रही हूँ कि आखिर कब तक बिहार के गरीब – प्रतिभावान खिलाड़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता रहेगा !

मैं पूछना चाहती हूँ कि क्या गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के प्रतिभावान बच्चों को क्रिकेट खेलने का कोई अधिकार है या नहीं क्योंकि ऐसे परिवार के बच्चों के पास अपने खेल में बेहतर प्रदर्शन करने सिवा और कुछ भी नहीं है लेकिन वर्तमान परिस्थिति ऐसी है की क्रिकेट के अन्य टूर्नामेंटों सहित चयन ट्रायल में लाख बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद भेद-भाव कर दरकिनार कर दिया जा रहा है और वैसे लोगों का चयन कर लिया जा रहा है जो ट्रायल में भी कुछ खास नहीं कर पा रहें हैं विजय मर्चेंट ट्रॉफी के लिये चयनित बिहार अंडर -16 टीम इसका प्रत्यक्ष गवाह है जो चयनकर्ताओं के कुकृत्य कार्यों को दिखा रहा है

बात सिर्फ मेरा बेटा कुमार श्रेय उर्फ राजा बाबू का चयन न होना ही नहीं है लेकिन कल जिस प्रकार से निराश होकर मेरा बेटा राजा बाबू ने आत्महत्या कर लेने जैसी शब्दों का इस्तेमाल कर लिया तो मेरी पैरों तले से जमीन ही घिसक गई तबसे मैं काफी सहमी और चिन्तित हूँ कि क्या इसी प्रकार के शब्द और दिन देखने के लिए बिहार की हर माँ और बाप अपने-अपने बच्चों को क्रिकेट खेलने के लिए मैदान तक ले जाते हैं ? चयन प्रक्रिया में इस प्रकार का खेल निरन्तर खेला जा रहा है क्योंकि हाल ही के दिनों में विजय हजारे ट्रॉफी में वैसे 6 खिलाड़ियों को शामिल कर लिया गया जो कहीं से रिजर्व खिलाड़ी के रूप में भी उनका नाम नहीं शामिल था

सुनने में आया है की उनमें दो खिलाड़ी विपूल कृष्णा और शशि शेखर ये ऐसे खिलाड़ी हैं जिनका बीसीसीआई में निबंधन भी नहीं है हद हो गई है अब अंडर – 16 में भी अगर ऐसा देखने को मिल जाय तो आश्चर्यचकित होने की बात नहीं होगी क्योंकि यहाँ यहीं हो रहा है लेकिन मैं सुनी हूँ की बीसीए के नव- निर्वाचित अध्यक्ष महोदय एक प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं तो मैं एक माँ होने के नाते बिहार के सभी गरीब व प्रतिभावान बच्चों के लिये आपसे इन्साफ की गुहार लगाती हूँ की चयन प्रतिभा के आधार पर होनी चाहिए पैसों पर नहीं क्योंकि हर माँ को अपनी जान से ज्यादा प्यार अपने बच्चों से होता है

और जिस प्रकार से मेरा बेटा राजा बाबू के साथ अन्याय हुआ और उससे निराश होकर उसने आत्महत्या कर लेने तक के बारे में सोच लिया और मैं सुनी वो बिहार की कोई और दुसरी माँ को सुनना नहीं पड़े इसके लिये आप चयन प्रक्रिया में किया गया वीडियोग्राफी को निकालकर देखें और उचित न्याय कर टीम चयन में संभव परिवर्तन भी करें और इस प्रकार के खेल में जो लोग भी शामिल है उनको समाने लाकर बीसीए में फैली गन्दगी को अपने से कोसों दूर रखें नहीं तो आपकी भी प्रतिष्ठा पर सवालिया निशान उठ सकता है

और अगर आप मेरी दर्द और पीड़ा को सुनकर न्याय नहीं किये तो मैं अन्ततः न्यायालय कि दरवाजा भी खट-खटा सकती हूँ और सबूत के रूप में मेरे पास ट्रायल का वीडियोफूटेज भी है जिसे मै आवश्यकता पड़ने पर कोर्ट में भी प्रस्तुत कर सकती हूँ लेकिन आपसे न्याय मिलने की हमें पुरा – पुरा उम्मीद है