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पटना 17 अक्टूबर: बिहार क्रिकेट पूरी तरह से ठप पड़ी है ऐसा इसलिए क्योकि वर्तमान में बिहार क्रिकेट एसोसिएशन में दो गुट हो चुके है इससे बीसीसीआई से लेकर बीसीए, डीसीए सभी भली भांति जानते है।

ओहि नागालैंड, उत्तराखंड जैसे छोटे-छोटे राज्य आगामी घरेलू सीजन की तैयारी में लगी हुई है तो बिहार क्रिकेट कोट पुलिस के चक्कर मे लगी है।बीते महीने बैंक ने भी बीसीए के दो गुट होने की ख़बर से बीसीए एकॉउंट को फ्रीज़ कर दिया।

आपको मालूम हो कि बैंक द्वारा बीसीए खाते को फ्रीज़ करने के बाद दोनों गुट ने खिलाडियों के टीए,दिए देने के लिए उत्सुकता दिखाई लेकिन क्या हुआ कुछ भी नही? जब खाता खुला था तब तो खिलाड़ी,अम्पायर,स्टाफ़ अपने हक़ के पैसे मांगते-मानते तक गए लेकिन बीसीए ने नही सुना।खाता बंद होते ही खिलाडियों, स्टाफ़ को अस्वाशन दिया गया कि खाता खुलते ही पैसे मिल जाएंगे।।

क्या हुआ इतनी नियुक्तियों का फायदा जब वह काम ही नही कर रहे है?

आपको बता दे कि भले ही देश एव बिहार में कोरोना महामारी में खेल गतिविधि बंद थी लेकिन बीसीए में पद की नियुक्तियों का दौर बंद नही था? जब एक बीसीए पदाधिकारी से पूछा गया कि इतनी नियुक्ति क्यो हो रही है तो उन्होंने बताया था कि क्योकि जब सीजन शुरू हो तो हर विभाग अपना काम देखेगी और इससे कोई भी कामो में देरी नही होंगी इसलिए।

लगभग सभी राज्य ने अपने सीनियर एव रणजी खिलाड़ियों का कैम्प लगा दिया है और जहाँ अभी नही लगा है वह ओपन ट्रायल करा कर कैम्प में खिलाडियों को परख कर टीम बनाने की सोच रहे है लेकिन बिहार में ऐसा कोई भी गतिविधि नही हो रही है? मानो क्रिकेट होगा ही नही? क्या बीसीए को यह नही सोचना चाहिए अगर बीसीसीआई की घरेलू टूर्नामेंट की घोषणा हो जाती है आज के बैठक में तो फिर शायद कैम्प लगाने का समय भी न मिल पाए।

आज 17 अक्टूबर को बीसीसीआई की एपेक्स काँसिल की बैठक है तथा बिहार क्रिकेट में चर्चा है कि इस बैठक में बिहार क्रिकेट के विवाद पर कोई बड़ा फैसला करने वाली है बीसीसीआई अब देखना है कि इस बैठक में क्या निर्णय होते है?