• लखीसराय में जिसने नयी कमिटी का चुनाव कराया बना है सचिव
  • दिवाकर का दावा था फर्जी कि तिवारी का फैसला अवैध!

खेलबिहार न्यूज़

मनोज कुमार के कलम से✍️

पटना 29 अक्टूबर : अजब है बीसीए इसकी गजब कहानी। आज आपको हम बिहार क्रिकेट संघ के अनूठे चरित्र और गजब कहानी से वाकिफ कराते हैं। यह नाम है लखीसराय जिला क्रिकेट संघ । जहां संघीय विवाद चरम पर है ।

एक समय लखीसराय जिला क्रिकेट संघ की ओर से दिवाकर कुमार ने बतौर सचिव, तत्कालीन लोकपाल बिहार क्रिकेट संघ जय नंदन सिंह के न्यायालय में दायर मुकदमा में दावा किया था कि लखीसराय जिला क्रिकेट संघ पर उनका हक है लेकिन बिहार क्रिकेट संघ के तत्कालीन कमेटी के मेल से प्रेम रंजन पटेल की अध्यक्षता वाली कमिटी को आयोजन संचालन का अधिकार अवैध तरीके से दिया गया है।

यहां उल्लेखनीय है कि दिवाकर की कमेटी का चुनाव पूर्व सचिव जयशंकर प्रसाद सिंह के द्वारा कराने का दावा किया था। उक्त कमेटी के अध्यक्ष अजय नारायण शर्मा हुआ करते थे। यह मामला फिलहाल लोकपाल में विचाराधीन है । इसी बीच 29 सितंबर 2019 को बिहार क्रिकेट संघ का चुनाव 2017 के मतदाता सूची के आधार पर संपन्न होता है।

जिसमें जयशंकर प्रसाद सिंह और अजय नारायण शर्मा क्रमशः सचिव और अध्यक्ष की हैसियत से मतदाता बनाए गए थे । हालांकि पूर्ण कमेटी का नाम वेबसाइट पर नहीं होने के कारण कोरम के अभाव में उन्हें मतदान से वंचित होना पड़ा था । बावजूद इसके बिहार क्रिकेट संघ की नवनिर्वाचित कमेटी गुजरे एक वर्ष में संपन्न हुए तमाम आयोजनों, वार्षिक आमसभा और विशेष आम सभा में जयशंकर प्रसाद सिंह को बतौर सचिव सदन में बैठने का, विचार व्यक्त करने का और अधिकार जताने का अधिकार प्रदान करती रही है ।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जयशंकर प्रसाद सिंह ने लखीसराय जिला क्रिकेट संघ का जो चुनाव कराया था वह अवैध था ? बतौर सचिव दिवाकर कुमार ने लोकपाल के न्यायालय में जो मामला दर्ज कर बीसीए के कदम को जो चुनौती दी थी वह मनगढंत था? या बीसीए की मौजूदा कमेटी जिस तरीके से लखीसराय जिला क्रिकेट संघ के सचिव के रूप में जयशंकर प्रसाद सिंह को सदन में बैठने का अधिकार देती है वह अवैध है ? ऐसे में लखी सराय जिला क्रिकेट संघ में प्रेम रंजन पटेल की अध्यक्षता वाली कमिटी की वैधता वाजिब बनती है!या फिर अध्यक्ष की ओर से बिहार क्रिकेट संघ को विवादों के भंवर में फांसने का यह नया तरीका है ।

बहरहाल बिहार क्रिकेट संघ के लिए यह दुर्भाग्यजनक किस्सा नया नहीं है । इस सूची में लखीसराय जिला क्रिकेट संघ के साथ सीतामढ़ी , मधुबनी मुजफ्फरपुर ,पूर्णिया ,बेतिया, वैशाली, गया, बक्सर जैसे कई जिला है जहां पिछली और मौजूदा बीसीए की कमेटी के निर्णय हितों का टकराव लेकर सामने है। इन जिलों में न सिर्फ समानांतर संगठन सुचारू है बल्कि विवादों के भंवर में संबंधित जिलों के खिलाड़ी पीस रहे हैं और सांगठनिक स्तर पर पदाधिकारी बेवजह लोकपाल से लेकर उच्च न्यायालय का चक्कर काटने को विवश हैं।