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पटना 30 अक्टूबर: सीएबी के सचिव आदित्य वर्मा ने बिहार क्रिकेट संघ के पदाधिकारीयों से कहा है कि नैतिकता का तकाजा है कि बीसीसीआई के द्वारा आहुत बीसीए के चुनाव मे 29.09.19 को चुने हूए पदाधिकारीयों ने आपसी विवाद के कारण बिहार क्रिकेट संघ के छवि को धुमिल कर दिया है।।

कुर्सी के लालच व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण मात्र एक साल के भीतर एक चुने हूए पदाधिकारीयों के आपसी झगड़े को बीसीसीआई ने काफी गम्भीरता से लेते हुए आखिर मे बिहार क्रिकेट के संचालन के लिए जल्द ही एक क्रिकेट कमिटी बना रहा है । यह अत्यंत ही खेद का विषय है की बिहार क्रिकेट संघ को 18 सालो के बाद अपना मान्यता मिला था साथ ही साथ बीसीसीआई ने बिहार क्रिकेट को 10.80 करोड़ रुपये का ग्रांट राशि भी दिया था।।

लेकिन उस पैसे का दुरूपयोग अधिकारियों के द्वारा किया गया यह एक बड़ा प्रश्न है जो जॉच के बाद ही सामने आएगा। बिहार क्रिकेट टीम के जूनियर सिनियर पुरूष महिला खिलाड़ियों को टीए डीए मैच फी नही दिया गया । कोरोना जैसे महामारी के समय जब हर परिवार आर्थिक तंगी झेल रहा था उस दरम्यान उस परिवार के खिलाड़ियों को जो राज्य क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व किया था उनका पैसा नही देना बहुत बड़ा अपराध था

कुछ लोगो को सीएबी से बेवजह परेशानी हो रही है क्योंकि उनको पता है कि सीएबी के आने से कुछ लोगो के मनमानी पर विराम लग जाएगा । सीएबी के सचिव के हैसियत से मै अपने पदाधिकारीयों की ओर से बिहार के क्रिकेटरो एवं खेल प्रेमीयों को यह भरोसा दिलाता हूं कि बिहार क्रिकेट आसमान की बुलंदी को छुएगा बशर्ते बिहार क्रिकेट का भला चाहने वाले एक मंच पर आ कर पुरानी गलतियों से सबक ले कर बिहार क्रिकेट के लिए जी जान लगा के बिना स्वार्थ के काम करे ।

सीएबी को दरकिनार कर बीसीए के स्वयंशंभु पदाधिकारीयों को मेरा नसीहत है कि बीसीसीआई आज के तिथि मे सीएबी को दरकिनार नही कर सकता है । बीसीए के साथ मिल कर काम करने मे सीएबी को गुरेज नही है ।नैतिकता के आधार पर बीसीए को इस मुकाम पे लाने वाले पदाधिकारी पद का परित्याग कर दे ।