12 फरवरी: क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड़ और पूर्व क्रिकेट वसीम जाफर के बीच छिड़ा विवाद बढ़ता ही जा रहा है. सीएयू ने वसीम जाफर पर धार्मिक भेदभाव और बायो बबल में ट्रेनिंग के दौरान मौलवियों को बुलाने का आरोप लगाया है. वसीम जाफर ने ट्वीट के जरिए पूरे मामले पर सफाई दी है. जाफर ने सीएयू के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने कभी भी ट्रेनिंग के दौरान मौलवियों को नहीं बुलाया.

मंगलवार को वसीम जाफर ने उत्तराखंड की टीम के कोच पद से इस्तीफा दिया था. वसीम जाफर ने क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद उत्तराखंड की टीम के कोच का पद संभाला था. जाफर के इस्तीफा देने के बाद ही बोर्ड और पूर्व भारतीय क्रिकेटर के बीच एक-दूसरे पर आरोप लगाने का सिलसिला शुरू हुआ.

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड ने आरोप लगाया कि वसीम जाफर टीम में मुस्लिम खिलाड़ी को बढ़ावा दे रहे थे. बोर्ड का आरोप था कि जाफर ने चंदिला की जगह इकबाल अब्दुल्ला को टीम का कप्तान बनाया. इसके साथ ही जाफर पर बायो बबल में ट्रेनिंग कैंप के दौरान मौलवियों को बुलाने का आरोप भी लगा.

लेकिन जाफर ने ट्वीट कर अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है. जाफर ने कहा, ”मैंने ट्रेनिंग कैंप के दौरान मौलवियों को नहीं बुलाया था. मैंने जय बिष्ठ को कप्तान बनाए जाने की वकालत की थी ना कि इकबाल को.”