• बीसीएल के खाते से एथिक ऑफ़िसर को पाँच लाख का भुगतान किन शर्तो पर ?
  • कहीं भुगतान में तो नहीं छिपा है बर्खास्तगी के फैसले का राज !
  • बीसीए का मूल खाता है फ़्रिज 

पटना 25 मई : बिहार क्रिकेट एसोसिएशन एवं एलीट स्पोर्ट्स के द्वारा  बिहार क्रिकेट लीग का आयोजन किया गया था। इस लीग को लेकर हर कोई सवाल खड़ा कर  रहा है यहां तक की खुद बीसीसीआई ने भी बीसीए से इस बीसीएल के आयोजन को लेकर  बीसीए से स्पष्टीकरण माँगा है। साथ ही बीसीए के एथिक ऑफिसर के बीसीए सचिव संजय कुमार पर दिए गए फैसले पर सवाल उठाया जा रहा है।

इसी मुद्दों पर सवाल उठाते हुए मुज़फ़्फ़रपुर जिला क्रिकेट संघ(उत्पल रंजन गुट) के सचिव मनोज कुमार ने प्रेस विग्यप्ति जारी कर कहा है कि” बिहार क्रिकेट संघ के तत्वावधान में बीसीसीआई के रोक के बावजूद बिहार क्रिकेट लीग का आयोजन खिलाड़ियों के लिए हितकारी था या आत्मघाती इसका फैसला आने वाला समय करेगा । लेकिन बीसीएल के आयोजन मद में वसूल की गई राशि का उपयोग निजी स्तर पर किये जाने से यह आरोप पुख्ता होता दिख रहा है कि बीसीएल का आयोजन बीसीए के चंद हुक्मरानों के लिए कमाई का धंधा भर था । जहां तक बीसीएल के आयोजन का सवाल है प्रारंभ से ही इस पर सवालिया निशान लगाए गए थे ।

विशेषकर जब बीसीसीआई ने बीसीएल के आयोजन की अनुमति से इनकार किया तो यह सवाल और गहरा हो गया था। बावजूद इसके बीसीए अध्यक्ष की मनमानी के कारण न सिर्फ बीसीएल का आयोजन हुआ बल्कि इससे जुड़े खिलाड़ियों और विजेता एवं उपविजेता टीम के लिए घोषित राशि को हड़प कर जाने से आयोजन की मंशा साफ हो गयी थी। अब बीसीएल के खाते से पांच लाख की राशि निकासी का मामला भी सामने आया है। सूत्रों की माने तो गुजरे 21 मई को बीसीएल के खाता संख्या 50200055013554 एच डी एफ सी बैंक बोडिंग रोड से पांच लाख रुपए का भुगतान बीसीए के कथित लोकपाल सह एथिक अफसर राघवेंद्र प्रसाद सिंह को किया गया है ।

जबकि यहाँ बीसीए का मूल खाता फ़्रिज होने पर एक और खाता 5020001955995 भी खोला गया था।बावजूद इसके इस खाते से भुगतान पर सवाल यह उठता है कि क्या वे बीसीएल के आयोजन में योगदान दे रहे थे ? या फिर यह भुगतान उन्हें पिछले दिनों बिहार क्रिकेट संघ के मानद सचिव संजय कुमार के खिलाफ कन्फ़्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट मामले में बर्खास्तगी संबंधी फैसला सुनाने के एवज में दिया गया है ! भुगतान की इतनी जल्दी क्या थी ? इसका खुलासा होना अभी शेष है! लेकिन जिस तरीके से बीसीएलके खाते का दुरुपयोग सामने आया है इससे स्पष्ट होता दिख रहा है कि इस आयोजन का उद्देश्य है पैसा उगाही था न कि खिलाड़ियों का विकास ! अगर बीसीए इस आयोजन से खिलाड़ियों का विकास चाहती तो निश्चित तौर पर आयोजन के पूर्व खिलाड़ियों के लिए जो बोली लगाई गई थी वह निर्धारित राशि आयोजन पूर्ण होने तक उनके खाते पर हस्तांतरित होना चाहिए था।

दूसरी ओर आयोजन के पूर्ण होने पर विजेता और उपविजेता टीम को निर्धारित राशि भी नहीं दी गई और शोर मचाने पर कहा गया कि आयोजन के दौरान ही इसके प्रायोजक बगैर पैसा फरार हो गए हैं । दूसरी ओर इस खाते से बिहार क्रिकेट संघ के कथित लोकपाल व एथिक आफिसर को पांच लाख की बड़ी राशि भुगतान करना निश्चय ही इस आरोप को बल दे रहा कि कहीं ना कहीं इस पैसे से बीसीए सचिव के खिलाफ फैसला निर्धारित कराने का काम किया गया है ? यहाँ यह भी गौरतलब है कि बीसीसीआई ने न सिर्फ बीसीएल को अवैध करार दिया है बल्कि इस संदर्भ में बीसीसीआई की जांच समिति भी आने वाले दिनों में बिहार आएगी और निश्चय ही बीसीएल पर लग रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच कर समुचित कार्रवाई का डंडा भी चलाएगी !