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पदों पर बने रहने का संवैधानिक अधिकार गंवा चुके हैं “संजय सिंह”:मनोज कुमार
- बीसीए का कमाल : अध्यक्ष ने जिसे भ्रष्टाचार का आरोपी बनाया उसे खजाने की चाभी थमा दी
- पदों पर बने रहने का संवैधानिक अधिकार गंवा चुके हैं “संजय ” !
- सहोदर भतीजे “कनिष्क” का चयन क्या कन्फ़्लिक्ट आफ़ इन्ट्रेस्ट नहीं?
पटना 26 अगस्त: बिहार क्रिकेट में मनमानी और बदहाली का ही आलम है कि जिस जिला प्रतिनिधि को कभी अध्यक्ष राकेश तिवारी ने भ्रष्टाचार के कठघरे में खड़ा कर जबाब तलब किया था कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट में शामिल होने का आरोप लगाया था साथ ही बाहरी खिलाड़ियों से कथित पैसा लेने संबंधी आरोप को गंभीर ठहराते हुए जांच की पहल की थी उसे ही आज बीसीए की चाबी थमा दी है। ये बाते मुज़फ्फरपुर जिला क्रिकेट संघ(उत्पल रंजन गुट) के सचिव मनोज कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा है।
उन्होंने बिहार क्रिकेट की वर्तमान इस्तिथि व अध्यक्ष के द्वारा लिए जा रहे निर्णय और संजय कुमार सिंह को लेकर कई आरोप लगाते हुए आगे कहा है कि” सोचने वाली बात यह है कि यह निर्णय ऐसी स्थिति में लिया गया है जब लोढ़ा कमेटी के प्रस्ताव और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार उनका कार्य अवधि अधिकतम छह वर्ष कई माह पूर्व ही पूर्ण हो चुका है। बावजूद इसके जिला प्रतिनिधि संजय सिंह को बीसीए के खजाने का अधिकारिक तौर पर हस्ताक्षरी बनाना कहां से उचित है जबकि उनके खिलाफ बीसीसीआई की भ्रष्टाचार नियामक संस्था पुनीत मल्लिक मामले की जांच कर रही है।

वहीं कार्यकाल अवधि पूर्ण होने के मामले में लोकपाल के न्यायालय में मामला विचाराधीन है।क्योंकि संजय सिंह मार्च 2015 से ही जमुई जिला क्रिकेट संघ में सचिव पद पर बनें थे और 2019 में बीसीए के जिला प्रतिनिधि पद पर चुने गये थे। ऐसे में उनके छह साल पदाधिकारी की अवधि मार्च 2021 को ही खत्म हो गयी है जबकि बीसीए के संविधान में संशोधन अथवा उनके कार्य काल में विस्तार की भी कोई सूचना नहीं है।
बीसीए अध्यक्ष की मनमानी का चक्का अपनी गति से बेरोक टोक चल रहा है। जो आवाजें उठ रही या तो उसे बरखास्तगी का फरमान सुनाया जा रहा है या लोकपाल के माध्यम से कानूनी अड़चन में फंसाया जा रहा है। पहले बीसीए सचिव संजय कुमार और अब संयुक्त सचिव कुमार अरविंद के साथ कुछ ऐसा ही देखने को मिला है।
श्री कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा” इसके इतर बीसीए अध्यक्ष ने इस बार जो सबसे बड़ा हथियार चलाया है वह उनके गले की फांस बन रही है। जिस जिला प्रतिनिधि संजय सिंह को अध्यक्ष ने क्रिकेट संचालन का अधिकार देने के साथ साथ खाता संचालन का अधिकार थमाया है एक तो वह सीओएम में पारित फैसला नहीं है, संविधान के अनुरूप भी नहीं है। दूसरा इसी जिला प्रतिनिधि के खिलाफ अध्यक्ष ने आपराधिक मामला दर्ज करने की चेतावनी देते हुए कारण पृच्छा किया था। तब अध्यक्ष राकेश तिवारी ने संजय सिंह के खिलाफ शिकायतकर्ता के हवाले से कन्फ़्लिक्ट आफ़ इन्ट्रेस्ट का आरोप उचित ठहराने के साथ साथ बाहरी राज्य के खिलाड़ियों से पैसा लेकर फर्जी कागज बनवाने और बिहार टीम में स्थान दिलाने को आपराधिक मामला बताते हुए जबाब माँगा था।
न जाने कैसे उक्त आरोप में जिला प्रतिनिधि कब और कैसे बरी हो गये ।जबकि बीसीसीआई की भ्रष्टाचार नियामक टीम अब भी पुनीत मल्लिक मामले में जांच कर रही है। और तो और एक बार फिर से अपने पद और अधिकार की धमक से संजय अपने सहोदर भतीजा कनिष्क कौस्तुभ का बीसीए अंडर 19 कैम्प में चयन करा चुके हैं। जो सीधे तौर पर लोढा कमेटी के प्रस्तावों के अनुसार कन्फ़्लिक्ट आफ़ इन्ट्रेस्ट का मामला बनता है।
इन तमाम अनदेखियों के बावजूद संजय अपने पद पर बने रहने का अधिकार गंवा चुके हैं क्योंकि जिला संघ और बीसीए के अधिकारी के रूप में उनका कार्यकाल महीनों पूर्व पूर्ण हो चुका है। ऐसे में कहाँ तो बीसीए को इस पद पर चुनाव अथवा अन्य प्रतिनिधि के चयन पर मंथन करनी चाहिए थी बावजूद इसके उसे बीसीए का हस्ताक्षरी बनाना समझ से परे है क्योंकि अध्यक्ष ने सचिव का प्रभार खुद ही अपने में समाहित रखा है और संयुक्त सचिव को सभी पदों के दायित्व से मुक्त करने का तुगलकी फरमान जारी कर रखा है।
मनोज कुमार द्वारा संजय कुमार सिंह पर लगाये गए आरोप को लेकर खेलबिहार ने संजय कुमार सिंह से भी जबाब मंगा है।



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