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बिहार सरकार के खेल विभाग द्वारा जारी नियुक्ति अधिसूचना में भारी अनियमितता : पेफी

पटना : फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पेफी) बिहार चैप्टर ने बिहार सरकार के खेल विभाग द्वारा हाल ही में जारी की गई नियुक्ति अधिसूचना सं. 01/स्था०-26(निय०)-02/2024/2640 पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। यह अधिसूचना जिला खेल पदाधिकारी, सहायक निदेशक (खेल), सहायक निदेशक (युवा) एवं व्याख्याता जैसे महत्वपूर्ण पदों की नियुक्ति से संबंधित है, जिसमें बी.पी.एड. एवं एम.पी.एड. जैसे शैक्षणिक अर्हताओं को पूरी तरह से नजरअंदाज कर केवल एन.आई.एस. डिप्लोमाधारी को प्राथमिकता दी गई है।

पेफी की राज्य संयुक्त सचिव श्रीमती मनाली एवं राष्ट्रीय सचिव डॉ.पीयूष जैन ने बताया कि यह अधिसूचना न केवल शारीरिक शिक्षा के विद्यार्थियों के हितों के विपरीत है,बल्कि एन.सी.टी.ई.और अन्य नियामक संस्थाओं के मानदंडों के भी प्रतिकूल है।

पेफी पटना के सचिव राजीव रंजन ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज की है –

1. एन.आई.एस. डिप्लोमा धारकों को प्रशिक्षक पद हेतु योग्य माना गया है, परंतु व्याख्याता, निदेशक या पदाधिकारी के लिए केवल प्रशिक्षकीय योग्यता को पर्याप्त मानना तर्कसंगत नहीं है।

2. एन.आई.एस. में केवल 26 खेलों की ट्रेनिंग दी जाती है, जबकि भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने 55 से अधिक खेलों को मान्यता प्रदान की है।

3. बी.पी.एड. और एम.पी.एड. धारक सभी खेलों, खेल संगठन और खेल प्रशासन में प्रशिक्षित होते हैं, जबकि एन.आई.एस. डिप्लोमा एकल खेल में सीमित है।

4. व्याख्याता पद हेतु एन.सी.टी.ई. के नियमानुसार एम.पी.एड. अनिवार्य है, जिसे अधिसूचना में पूरी तरह अनदेखा किया गया है।

5. देश के अन्य राज्यों में ऐसी नियुक्तियों में एम.पी.एड., नेट एवं पीएच.डी. को अनिवार्य किया गया है, जबकि बिहार की अधिसूचना में शारीरिक शिक्षा में स्नातक तक को शामिल नहीं किया गया है।

6. खेल अर्हता में रेलवे और पुलिस खेलों को प्राथमिकता देना आम जनता और सामान्य विद्यार्थियों के अवसरों को सीमित करता है।

7. अखिल भारतीय विश्वविद्यालय खेलों को अनिवार्य मानने के बावजूद अधिसूचना में खेल प्रतियोगिता की विविध संरचनाओं को नजरअंदाज किया गया है।

पेफी-बिहार चैप्टर ने इस संदर्भ में माननीय मुख्यमंत्री,शिक्षा मंत्री,खेल मंत्री,अपर मुख्य सचिव (खेल विभाग), निदेशक (खेल विभाग), तथा बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक से संपर्क कर इस अधिसूचना में संशोधन की मांग की और आवेदन भी समर्पित किया है। पेफी का स्पष्ट मत है कि इस अधिसूचना से योग्य बी.पी.एड. और एम.पी.एड.धारक अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ है। यह निर्णय न केवल शारीरिक शिक्षा क्षेत्र की उपेक्षा करता है, बल्कि बिहार में खेल विकास की दूरदृष्टि को भी कमजोर करता है। फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PEFI) बिहार सरकार से आग्रह करता है कि इस गंभीर विषय पर अविलंब संज्ञान लेते हुए उचित संशोधन करे, ताकि योग्यता,न्याय और पारदर्शिता की स्थापना हो सके।

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