- माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना कर बिहार की अस्मिता से खिलवाड़ करने वालों पर जद (यू.) कला, संस्कृति एवं खेल प्रकोष्ठ ने जताई कड़ी आपत्ति
- 20 अगस्त की ऐतिहासिक सुनवाई और आदेश पारित कराने के लिए बीसीए के पूर्व सचिव अमित कुमार और आदित्य वर्मा ने लड़ी लंबी कानूनी लड़ाई
पटना। बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) में कथित अनियमितताओं को लेकर 20 अगस्त 2026 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में हुई महत्वपूर्ण सुनवाई और उसके बाद न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के बावजूद यदि पुरानी व्यवस्था के प्रभाव में क्रिकेट कैंप, चयन अथवा अन्य गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, तो यह न केवल अनैतिक है, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की मूल भावना के विपरीत भी है। ऐसे मामलों पर अब चुप्पी नहीं साधी जाएगी।
यह कड़ा बयान जनता दल (यूनाइटेड) कला, संस्कृति एवं खेल प्रकोष्ठ, बिहार प्रदेश के अध्यक्ष एवं बीसीए मिडिया कमिटी के पूर्व चेयरमैन कृष्णा पटेल ने दिया है।
कृष्णा पटेल ने कहा कि बिहार क्रिकेट किसी व्यक्ति, गुट अथवा निजी संस्था की जागीर नहीं है। यह बिहार के लाखों खिलाड़ियों, क्रिकेट प्रेमियों और प्रदेश की प्रतिष्ठा से जुड़ा विषय है। इसलिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद भी यदि कोई व्यक्ति अथवा समूह पुरानी व्यवस्था को बनाए रखने या खिलाड़ियों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न करने का प्रयास करता है, तो इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, “देश की सर्वोच्च अदालत का आदेश सर्वोपरि है। न्यायालय के आदेश और उसकी भावना के खिलाफ जाकर बिहार क्रिकेट की अस्मिता एवं खिलाड़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करने वालों को जद (यू.) कला, संस्कृति एवं खेल प्रकोष्ठ लोकतांत्रिक, संवैधानिक और कानूनी दायरे में मुंहतोड़ जवाब देगा।”

कृष्णा पटेल ने सवाल उठाया कि जब बीसीए से जुड़े विवाद और कथित अनियमितताओं का मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुका है तथा न्यायालय ने हस्तक्षेप किया है, तब ऐसी परिस्थिति में विवादित पुरानी व्यवस्था के प्रभाव में कैंप अथवा चयन जैसी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों है?
उन्होंने कहा कि बिहार के खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों को यह जानने का अधिकार है कि कैंप और चयन किस अधिकृत व्यवस्था, किस आदेश तथा किसकी जवाबदेही के अंतर्गत आयोजित किए जा रहे हैं। खिलाड़ियों के भविष्य से जुड़े किसी भी निर्णय में भ्रम अथवा अपारदर्शिता की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

कृष्णा पटेल ने कहा कि 20 अगस्त 2026 की सुनवाई कोई सामान्य घटनाक्रम नहीं था। बिहार क्रिकेट में लंबे समय से चली आ रही कथित अनियमितताओं के विरुद्ध बीसीए के पूर्व सचिव एवं सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता अमित कुमार तथा आदित्य वर्मा ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। इस संघर्ष को किसी व्यक्ति विशेष की लड़ाई बताकर छोटा नहीं किया जा सकता। इसका मूल प्रश्न बिहार क्रिकेट में पारदर्शिता, निष्पक्षता और खिलाड़ियों के अधिकारों की रक्षा से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद सभी संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। अब खिलाड़ियों के चयन, प्रशिक्षण, कैंप और क्रिकेट प्रशासन से जुड़ी प्रत्येक गतिविधि में यह स्पष्ट होना चाहिए कि वह किस सक्षम एवं अधिकृत व्यवस्था के अंतर्गत संचालित की जा रही है।
कृष्णा पटेल ने कहा, “बिहार के प्रतिभावान खिलाड़ियों के भविष्य को किसी गुटबाजी, मनमानी अथवा निजी स्वार्थ की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। खिलाड़ी किसी के प्रयोग की वस्तु नहीं हैं। बिहार क्रिकेट में अब नियम, पारदर्शिता और न्यायसंगत व्यवस्था ही सर्वोपरि होनी चाहिए।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि जद (यू.) कला, संस्कृति एवं खेल प्रकोष्ठ बिहार के खिलाड़ियों के हित में प्रत्येक वैधानिक, लोकतांत्रिक और संवैधानिक मंच पर अपनी आवाज मजबूती से उठाएगा। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित सक्षम प्राधिकार के समक्ष भी तथ्यों एवं दस्तावेजों के साथ पूरे मामले को रखा जाएगा।
अंत में कृष्णा पटेल ने कहा, हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि अनियमितता, अपारदर्शिता और मनमानी के खिलाफ है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय का सम्मान और बिहार के खिलाड़ियों का भविष्य हमारे लिए सर्वोपरि है। बिहार की अस्मिता से न समझौता हुआ है और न होने दिया जाएगा। अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ तो तथाकथित बीसीए पदाधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोला जाएगा।
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