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जिला विवाद को हमेशा के लिए ख़त्म करने के लिए बीसीए अध्यक्ष को उत्पल रंजन ने दिए तीन सुझाव,

Khelbihar.com

Patna: बिहार क्रिकेट में जिला विवाद चल रहा था वह आज भी एक समस्या बनी हुई है और दूसरे पक्ष बाले त्रि सदस्य समिति का फैसला सैयद मानने के लिए तैयार नही है ऐसा कई जिला में देखा जा सकता है इसी विवाद को पूरी तरह से खत्म करने के लिए मुज़फ़्फ़रपुर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष उत्पल रंजन ने बीसीए अध्यक्ष को तीन सुझाव दिए है ।

सदस्यीय समिति का फैसला जिला के विवाद को खत्म नही और बढ़ा ही दिया है।अगर वास्तव में आप क्रिकेट को आगे बढ़ाना और जिला के विवाद को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं तो मेरे हिसाब से तीन ही विकल्प हैं अगर इसमे में से आप एक भी विकल्प को अपनाएंगे तो मुझे पूरा भरोसा है कि हर जिला का विवाद हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा और बिहार क्रिकेट आपको हमेशा के लिए याद रखेगा,

आपका नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा,खासकर मुजफ्फरपुर के मामले में क्योंकि हमारे जिला में संघ का विवाद 2010 से है और एक ही परिवार का खिलाड़ियों पर प्रताड़ना 20-25 सालों से है।
ये तीन विकल्प आप पहले से ही अच्छे से जानते हैं फिर भी मैं आपको सुझाव दे रहा हूँ।


*1 .* जिला से सभी समितियों को मिलाकर एक समिति बना दें।इसकी शायद आपने कोशिश की लेकिन सफलता नही मिली।
2 . जिला की सभी समितियों को भंग कर बिहार क्रिकेट संघ की निगरानी में पर्यवेक्षक और चुनाव अधिकारी नियुक्त कर लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव करवा दें साथ पहले सभी से शपथपत्र ले लें कि इस चुनाव के निर्णय का सभी को मान्य होगा और कोई विवाद नही होगा।
3 . हर विवादित या बड़ा जिला को दो भागों में बांट दें, पूर्वी और पश्चिमी,दोनों भागों को क्रिकेट के हिसाब से दो जिला हो जाये जिसे बीसीए में वोट का अधिकार हो,हर उम्र का जिला टीम दोनों बनाए,हेमन ट्रॉफी टीम भी अलग हो।दोनों भागों की समिति अपना अपना चुनाव बीसीए संविधान के अनुसार करवाये।

इसमे जिला का कोई भी क्लब या खिलाड़ी चाहे वो किसी भी दिशा में रहता हो,किसी भी दिशा के समिति के साथ खेल सकता हो,हाँ अगर वो एक समिति से दूसरे समिति में अगले साल जाना हो तो NOC लेकर जा सकता है।किसी भी दिशा का मैच किसी भी दिशा के मैदान में हो सकता है बशर्ते उस मैदान का लिखित अनुमति हो।मेरा कहने का मतलब है कि इस एक जिला के दोनों समिति को पूर्ण जिला समिति का अधिकार हो और जिला के क्लब या खिलाड़ी पर कोई पाबंदी नही हो वो किसी भी समिति के साथ खेल सकती है,दूसरे साल बदलने के लिए NOC की जरूरी हो।


महोदय अगर थोड़ा आप किसी के निजी हित या ईगो से हटकर उपर्युक्त तीन में से एक पर भी अमल करते हैं तो जिले की समस्या का हमेशा के लिए निदान हो जाएगा

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